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रैगिंग
कानूनन अपराध
कालेजों में रैगिंग को माननीय सर्वोच्च न्यायालय ने संज्ञेय अपराध की श्रेणी में स्थापित किया है । रैगिंग असमाजिक आपराधिक एवं अमानवीय कृत्य है जिसे हर दशा में रोका जाना चाहिए । इस आपराधिक कृत्य को समूल नष्ट करने के उद्देश्य से इसमें संलिप्त विद्यार्थियों के विरुद्ध कठोर दण्डात्मक कार्यवाही की जाती है । इसमें ढाई सम्मिलित है । इसमें दोषी पाये जाने पर विद्यार्थियों के विरुद्ध रैगिंग समिति अपराध के गम्भीरता को देखते हुये लाख रुपये तक का अर्थदण्ड भी निम्नलिखित कार्यवाही कर सकती है ।
प्रवेशार्थी का प्रवेश निरस्त किया जाना ।
महाविद्यालय से निष्कासन / निलम्बन किया जाना ।
किसी अन्य संस्थान में प्रवेश लेने से वंचित किया जाना ।
प्रदत्त शैक्षिक सुविधाओं की वापसी ।
अपराध की प्रवृत्ति के अनुसार मुकदमा चलाया जाना भी सम्मिलित है ।
रैगिंग का तात्पर्य
किसी छात्र / छात्रा को बोलकर लिखकर, संकेत द्वारा, हाव – भाव से या शारीरिक गतिविधियों से क्षति पहुंचाना, मानसिक रूप से प्रताड़ित करना भौतिक रूप से कष्ट पहुंचाना नवीन प्रवेशार्थी परेशान करना, उनके क्रियाकलापों में गतिरोध उत्पन्न करना तथा उन्हें उन कार्यों को करने के व कनिष्ठ छात्र / छात्राओं को डराना, धमकाना, मानसिक आघात पहुंचाना, हतोत्साहित करना, असहजता अनुभव होती हो या उन्हें मानसिक रूप से कष्ट होता हो । इसके अतिरिक्त किसी कार्य करने के लिए बाध्य करना जिन्हें वे करना नहीं चाहते या शर्म महसूस करते हैं या जिन्हें करने में उन्हें छात्र / छात्रा को दुष्कृत्य हेतु प्रेरित करना भी इसी अपराध की श्रेणी में आता है ।
रैगिंग निरोधक समिति / रैगिंग निरोधक दस्ता
माननीय उच्चतम न्यायालय के पत्र सं . 310 / 04 ए.आई.ए. दिनांक 26 फरवरी 2009 तथा 27 2009 को दृष्टिगत रखते हुये यू.जी.सी. एवं कुलाधिपति ( महामहिम राज्यपाल, उत्तराखण्ड शासन ) के निर्देशानुसार महाविद्यालय में भी एक रैगिंग निरोधक समिति ( Anti Ragging Committee ) एवं रैगिंग निरोधक दस्ता ( Anti Ragging Squad ) का गठन किया जाता है, जो कि महाविद्यालय परिसर में रैगिंग सम्बन्धी किसी भी प्रकार की गतिविधि पर सख्ती से नजर है रखती है तथा ऐसी किसी भी घटना पर कठोरतम कार्यवाही हेतु सबल संस्तुति भी प्रदान करती है
Anti Ragging Rule PDF
Anti Ragging Link :